2 months agoग़ज़ल वो फिर आया है मुझे छोड़ जाने के लिए, मैं तमाशा बन गया हूँ इस ज़माने के लिए। मेरे अलावा भी कई आशिक़ थे उसके मगर, मुझको ही चुना उसने आज़माने के लिए। कहती है वो मुझसे भी ज़्यादा प्यार करता है, अच्छा ख़याल है दिल को बहलाने के लिए। किसी को बिन माँगे ही दावत नसीब हो गई, हम भीख ही माँगते रहे कुछ खाने के लिए। आज मेरी ग़ुरबत पे हँस रहे हैं ये लोग, एक रोज़ तुम भी खड़े होगे हाथ मिलाने के लिए। हमने भी बुझा दी दिल की चिराग़-ए-उम्मीद, रौशनी अब ठीक नहीं इस वीराने के लिए। मेरे मरने की दुआ न माँग, मेरी जान, तेरा ग़म काफ़ी है मुझको मर जाने के लिए। मुझे छोड़ते वक़्त ये ख़याल तो आया होगा, क़समें भी तो खाई थीं रिश्ता निभाने के लिए। बिन कुछ कहे ही मान गई वो शादी के लिए, हमने तो हाथ भी काटे थे उसे मनाने के लिए। हमने सोचा था एक झटके में भुला देंगे उसे, ज़िंदगी भी कम पड़ गई उसे भुलाने के लिए। By me
