Posted On: March 22nd 2026, 08:36 pm
(श्री राम जी कहते है)
असंकल्पितमेवेह यदकस्मात् प्रवर्तते ।
निवर्त्यारब्धमारम्भैर्ननु दैवस्य कर्म तत् ॥ २४॥
- जो बात बिना सोचे-विचारे अकस्मात् सिरपर आ पड़ती है और प्रयत्नोंद्वारा आरम्भ किये हुए कार्यको रोककर एक नया ही काण्ड उपस्थित कर देती है, अवश्य वह दैवका ही विधान है ॥ २४॥ (अयोध्याकाण्डे त्रयोविंशः सर्गः)
..
...
....
#ramayana #shreeram #shriram #रामायण #जयश्रीराम