Posted On: July 15th 2026, 03:15 pm
अंदर की खामोशी का शोर... 🥀
क्या आपने भी कभी इसे महसूस किया है?
जब हम किसी अनजान शहर में होते हैं, तो रात का सन्नाटा अक्सर बहुत कुछ कह जाता है। दिन की भागदौड़ के बाद जब हम अकेले बैठते हैं, तब यह एहसास और गहरा हो जाता है। यह ग़ज़ल उसी सन्नाटे और तन्हाई की आवाज़ है।
अगर आप भी घर से दूर हैं या इस एहसास से गुज़रे हैं, तो यह आपके लिए है। ❤️
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