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3 months ago
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Posted On: July 24th 2026, 02:30 pm
'मसान' का वो रूमानी गीत "तू किसी रेल-सी गुज़रती है" लिखने वाले दुष्यंत कुमार सिर्फ प्यार के नहीं, बगावत के भी शायर थे।

50 साल पहले जब आम आदमी सिस्टम की कमियों, महंगाई और भ्रष्टाचार से जूझ रहा था, तब उन्होंने यह गज़ल लिखी थी। लेकिन आज भी जब हम अपने आस-पास देखते हैं, तो लगता है जैसे कुछ बदला ही नहीं है। यह गज़ल आज भी उतनी ही सच है, जितनी तब थी।

आपको क्या लगता है, क्या आज के सिस्टम में भी इस 'गंगा' के निकलने की ज़रूरत है? कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर दें! 👇
(पूरी गज़ल सुनने के लिए रील एंड तक देखें)

#DushyantKumar #HindiKavita #genz #youthpower #cjp
Comments (2)
devesh_hatolkar3009_ 3 months ago

devesh_hatolkar3009_

Bohot badhiya 🙌👏

sujith_1601 3 months ago

sujith_1601

👏👏

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