Posted On: October 13th 2026, 04:03 pm
• महाभारत के युद्ध में विजयी होने के बाद, पांडव अपने ही परिजनों (कौरवों और भाइयों) की हत्या के पाप से मुक्ति और मोक्ष पाना चाहते थे।
• वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए उनकी खोज में निकले, लेकिन भगवान शिव पांडवों से रुष्ट थे और उन्हें आसानी से दर्शन नहीं देना चाहते थे।
• शिवजी पांडवों से छिपने के लिए बैल (वृषभ) का रूप धारण कर हिमालय में चले गए।
• पांडवों ने जब शिवजी को पहचान लिया, तब भीम ने आगे बढ़कर उस बैल को पकड़ने की कोशिश की।
• संघर्ष के दौरान भगवान शिव का बैल रूपी शरीर धरती में समाने लगा।
• बैल का कूबड़ वाला भाग केदारनाथ में प्रकट हुआ, भुजाएं तुंगनाथ में, नाभि मदमहेश्वर में, मुख रुद्रनाथ में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुई। इन्हें ही पंच केदार के रूप में जाना जाता है।
• भगवान शिव पांडवों की सच्ची भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर पाप मुक्त कर दिया।
• इसके बाद पांडवों ने केदारनाथ में भगवान शिव के इस रूप (कूबड़) की पूजा करते हुए वहां प्रथम मंदिर का निर्माण कराया।
• वर्तमान भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा कराया गया था। यहाँ गर्भगृह में त्रिकोणीय/अनियमित आकार की शिला की शिव के सदाशिव रूप में पूजा होती है।
Har Har Mahadev 🕉️🙏
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