Posted On: October 27th 2026, 05:13 pm
पुष्करं सर्वतीर्थानां गुरुराद्यः प्रकीर्तितः
दशकोटिसहस्राणि तीर्थानि वै महामुने।
सान्निध्यं पुष्करे तेषां त्रिसन्ध्यं कुरुनन्दन।।"
अर्थ: हे कुरुनन्दन! इस ब्रह्मांड में जितने भी कोटि-कोटि (करोड़ों) तीर्थ हैं, वे सभी तीनों संध्याओं (प्रातः, मध्याह्न और सायं) के समय साक्षात् पुष्कर में उपस्थित रहते हैं।
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