Posted On: January 23rd 2025, 03:26 pm
खुद कर नाराजियां, रूठा है कई बार
देखो उसे जोड़ के ,जो टूटा है कई बार
हो कर हैरान देखता हूं उसको कई बार
एकाद वाकिया भी तो, होता है कई बार
बदले वफा के, भला होता रहा है क्या
मंजूर ए खुदा होने पे सोचा है कई बार
इन फ़लसफ़ों, वजाहतों को खैर छोड़िए
लिख अपने आप को, फेंका है कई बार
कर हौसला सा फिर से चल पड़ता हूं मैं
मुझे जिंदगी ने गिरा के देखा है कई बार..
iNDU🖋️💫