Instagram story viewer> @iraavipurohit> Post
3 months ago
Co Creator: dharm.charcha
5
Posted On: August 11th 2026, 11:26 am
Tagged Users:
कुछ लोगों ने प्रश्न किया कि कल के ग्रहण का क्या प्रभाव रहेगा? समय क्या है? क्या करें, क्या न करें आदि।

पहले तो मुझे आश्चर्य हुआ कि यह प्रश्न आया ही क्यों, क्योंकि जब स्पष्ट रूप से ज्ञात है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, तो फिर भारत में इसे लेकर इतना भय और चिंता क्यों?

लेकिन जब इंटरनेट पर देखा तो ग्रहण को लेकर तरह-तरह की बातें और डराने वाले फलादेश दिखाई देने लगे। कोई कह रहा है कि यह होगा, कोई कह रहा है कि वह होगा। तब लगा कि इस विषय पर थोड़ी शास्त्रीय बात स्पष्ट रूप से होनी चाहिए।

सबसे पहले एक बात समझना आवश्यक है—ग्रहण कोई अदृश्य, रहस्यमय या अचानक घटने वाली घटना नहीं है। भारतीय परंपरा में ग्रहण का उल्लेख अत्यंत प्राचीन है।

अब प्रश्न आता है—क्या दुनिया में कहीं ग्रहण लगने मात्र से हर व्यक्ति पर उसका कोई अनिवार्य व्यक्तिगत अनिष्ट प्रभाव पड़ता है?

ज्योतिष और धर्मशास्त्र में ग्रहण के संबंध में अनेक नियम और फल-विचार मिलते हैं, लेकिन हर ग्रहण
Comments (5)
iraavipurohit 3 months ago

iraavipurohit

ज्योतिष और धर्मशास्त्र में ग्रहण के संबंध में अनेक नियम और फल-विचार मिलते हैं, लेकिन हर ग्रहण को लेकर प्रत्येक व्यक्ति के लिए निश्चित रूप से “अब यह दुर्घटना होगी”, “यह बीमारी होगी”, “व्यापार में नुकसान होगा”, “परिवार में अनिष्ट होगा” जैसी बातें कहना तभी उचित है जब उस जातक की कुण्डली में ऐसे योग बनते हो। खगोलीय गति के कारण कई बार अमावस्या और पूर्णिमा को विश्व मे कहीं न कही ग्रहण हो सकता है परन्तु प्रभाव केवल वही प्रत्यक्ष रूप से होगा जहां वो दृष्टिगोचर हो। बाकी अप्रत्यक्ष या सूक्ष्म प्रभाव पूरी पृथ्वी, विभिन्न देशों के मध्य सम्बंध पर हो सकता है फिर भी अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक तिथियाँ हैं, और इन दिनों व्रत, स्नान, दान, जप, तर्पण आदि की अनेक परंपराएँ हैं। और हमारे ऋषियों ने इन दिनों दान जप तप अन्य धार्मिक कर्मो का विशेष महत्व बताया ही है।

ms_science_classes 3 months ago

ms_science_classes

🙌 jai ho 🙏

More posts

back to up