a month agoतेरी सुराही सी गर्दन पर वो जो काला तिल सजा है, सच कहूँ तो वो सिर्फ तिल नहीं, हुस्न का पहरेदार बना है। ज़माने की नज़रों से बचाने को जो तैनात है वहाँ, उस एक पहरेदार पर ही ये दिल पूरी तरह फ़िदा है। जब लहराती हैं ज़ुल्फ़ें और वो तिल नज़र आता है, ख़ुदा की क़सम, हर देखने वाले का होश चला जाता है। कोई लाख संभाले खुद को तेरी इस पाक सूरत के आगे, पर वो छोटा सा पहरेदार, सीधे रूह में उतर जाता है।
