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 by @192.168.02.8
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2 years ago
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"इतिहास के खंडहरों में छुपी कहानियाँ... ⏳🏛️
छत्तीसगढ़ का तुमान—कलचुरी राजवंश की प्राचीन राजधानी, जहाँ हर पत्थर में बीते युगों की गूंज है। 🏺✨
शिव मंदिर की शिल्पकला और जैन मंदिरों के अवशेष आज भी इतिहास के सुनहरे अध्याय बयां करते हैं।

#Tuman #ChhattisgarhDiaries #Heritage #KalchuriEmpire #AncientTemples #HistoryUnfolded" by @192.168.02.8
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2 years ago
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मैं शब्दों के पार भी एक अर्थ थी,
जिसे सुना नहीं गया।
मैं समय की लहरों में भी एक सिरे थी,
जिसे थामा नहीं गया।
मैं उस आईने का प्रतिबिंब थी,
जिसे देखा तो गया,
पर समझा नहीं गया।

मैंने चाहा—
कि मैं सिर्फ़ मैं रहूँ,
बिना किसी नाम, बिना किसी सीमा,
बिना किसी भूमिका के।
पर मुझसे कहा गया—
तुम किसी की हो,
किसी के लिए हो,
किसी पहचान में हो।

मैं हँसी—
जैसे कोई पहाड़ हवा से कहे,
तू बस छाँव देने के लिए है।
जैसे कोई नदी धार से कहे,
तू बस किनारों में बहने के लिए है।
मैंने बहने से इंकार कर दिया,
पर मुझे प्यास कह दिया गया।
मैंने उड़ने की चाह रखी,
पर मुझे जड़ कह दिया गया।

अब मैं कहती हूँ—
मैं कोई दीवार नहीं,
कोई चौखट नहीं,
कोई देह नहीं,
कोई संबंध नहीं।
मैं सिर्फ़ मैं हूँ,
जो अनसुनी थी,
जो अनदेखी थी,
पर अब रहेगी—
अपनी तरह, अपने लिए। by @192.168.02.8
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2 years ago
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घने अलकों की छाया में, मधुर रात्रि जब ठहरी,
वह सुमधुर घटा का विस्तार, शशि किरणों से सँवरी।
स्वर्ण-शिखर से झरती लौ, जब हल्की थरथर आई,
लज्जा से झुके कुसुमदल, मन में मदिरा भर लाई।

गौर देह पर झिलमिल मोती, उरुज-कुसुम सिहराए,
जलतरंग की हल्की धुन में, चंचल छाया लहराए।
नीरज-कुंज में मंद बयारें, प्रेम-बिंदु जब ठहरीं,
मौन निशा में तृप्त कथा थी, सुधा-बूँद जब झरी।

गहरी घाटी, लहराते शिखर, मृदु स्वर्णिम जलधारा,
अल्हड़ मद में हँसती बूँदें, श्वासों का गूँजित तारा।
कली अधखिली जब सिहर उठी, रोमांच हृदय में आया,
प्रकृति के उर में नर्तन छेड़, रूप का जादू छाया।

नीरव बेला, चंदन-गंध, अलकें चंचल, भीगे आँचल,
अधर कपोलों की छाया में, चूम रही थी निशा निर्मल।
मृदु उरोजों पर मधुर रश्मियाँ, जैसे बिखरी हो किरण-ज्योति,
श्वासों की लहरी को छूकर, अंगों में फूटी सुधा-स्रोत।

मदिर छुवन से पुलक उठी जब, सिहरन मन में बिखर गई,
कुंतल-जाल से रिसती खुशबू, जैसे पुरवा सँवर गई।
प्रेम-विहान में मंद घटाएँ, नीरज-पथ पर नाच उठीं,
सघन कुंज में रस-कण बिखरे, रजनीगंधा हुलस उठीं।

कली खिली थी युगल-कुंज में, यौवन-द्वार लहराया,
नील घटा से झरते मोती, सुषमा ने रूप बसाया।
श्वेत चाँदनी चुपके हौले, पंखुड़ियों में बस आई,
मौन तृषा में गूँज उठा था, नीरव जल का शहनाई। by @192.168.02.8
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2 years ago
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"धूल, जाले और मैं"

कमरा चुप। लेकिन क्या सचमुच?

यहाँ हर चीज़ चीख़ रही है—

धूल, जाले, बेतरतीब बिस्तर,

फर्श पर गिरी किताब,

और किचन में पड़े ठंडे बर्तन।

धूल इतनी गहरी कि जैसे सदियों से कोई हाथ नहीं लगा।

या शायद मैं ही नहीं चाहता कि कोई इसे छुए।

क्योंकि अगर इसे साफ़ किया,

तो जो छिपा है, वो दिख जाएगा।

और मैं... मैं ख़ुद को नहीं देख सकता।

बिस्तर, हाँ, वही बिस्तर,

जहाँ मैं करवटें बदलता हूँ,

लेकिन करवटों से तक़दीरें नहीं बदला करतीं।

तकिये की सिलवटें चीख़ती हैं,

रातभर चली बहसों की तरह,

जो मैंने ख़ुद से लड़ी, और हारी।

किचन... बर्तन ठंडे पड़े हैं।

शायद सुबह की भूख भी अब मर गई।

या शायद मैं ही भूल गया कि भूख कैसी लगती थी।

गैस पर रखा चाय का भगोना—जला नहीं,

क्योंकि जलाने की हिम्मत भी तो चाहिए।

और ये जाले?

अरे नहीं, ये सिर्फ मकड़ियों का जाल नहीं,

ये मेरे ही बुने हुए हैं।

सोचों के, पछतावों के, खोई हुई संभावनाओं के।

क्योंकि मैं... मैं ख़ुद को ही फँसा चुका हूँ।

और अब इस कमरे के बाहर जाने की चाह भी नहीं बची।

कमरा चुप?

नहीं... ये कमरा मेरी चीख़ है।

और मैं—इसकी गूँज। by @192.168.02.8
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2 years ago
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 by @192.168.02.8
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2 years ago
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Buddha by @192.168.02.8
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3 years ago
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Intrinsic carvings of gods goddesses animals and nature elements and pattern Elephants pattern taken in Malhar, Chhattīsgarh, India by @192.168.02.8
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3 years ago
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Pataaleshwar Mahadev Mandir taken in Malhar, Chhattīsgarh, India by @192.168.02.8
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3 years ago
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Bheem-Kichak (Shiva)Temple taken in Malhar, Chhattīsgarh, India by @192.168.02.8
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3 years ago
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 by @192.168.02.8
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4 years ago
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Happy day with happy people taken in Varanasi : City of Ghats & Temples by @192.168.02.8
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4 years ago
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