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All pictures are click by me and most of the captions written by me..Love to follow beautiful gallerys..no trade on following allow though.
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27 सितंबर, यही वो तारीख़ है जब पिछले साल पापाजी के साथ आख़िरी बार घर पर रहने का मौक़ा मिला। हालाँकि मेरे लिये तो पूरी तरह पापाजी के साथ रहने की तारीख़ 26 सितंबर ही है क्योंकि 27 को मैं सुबह कुछ देर रहने के बाद सीधे शाम को ड्यूटी से वापस आने के बाद पापाजी से मिल पायी थी। पर वो 3-4 घंटे का समय कुछ अलग सा ही था। उन दिनों नवरात्रि थी, पहले दिन यानी 26 सितंबर को पापाजी पूरे परिवार के साथ सोसायटी में नीचे गरबा देखने पहुँचे थे और वहाँ इडली खाकर बहुत  ख़ुश थे। उन दिनों इडली उनकी फ़ेवरेट सी हो गई थी क्योंकि बहुत सादा और थोड़ा ही खाना खाने लगे थे। हमें लगा था कि पहले दिन नीचे जाकर वो थक गए हैं और अगले दिन वो शायद नीचे न जाना चाहें। पर आश्चर्य था कि पापाजी बहुत खुश थे और नीचे गरबा देखने जाना चाहते थे। वह लगातार मंत्रज्ञ से भी कह रहे थे कि दोनों को जल्दी तैयार होकर नीचे जाना है। ख़ुद ही तैयार भी हो रहे थे जो कि उन दिनों इतना आम नहीं था। कुछ दिन पहले से पापाजी की सेहत में सुधार नज़र आने लगा था। वो अपना फ़ोन ख़ुद से चलाने लगे थे, मुझे सोसायटी के प्रोग्राम में भाग लेने के लिये ख़ुद ही कहा करते। पहली बार एक बहुरंगी टॉप लाने पर मैं थोड़ा संकोच में थी तो पापाजी से ही पूछी कि ठीक लग रही है या नहीं? तो पापाजी बोले कि नवरात्रि और गरबा में ऐसे ही कपड़े पहनते हैं, अच्छा लगता है।और मैं 26 को वही पहनकर नीचे गई थी और हमने साथ में फोटो भी ली थी। 

उस फोटो को लेकर हम इसलिए भी बहुत खुश थे क्योंकि पहली बार ऐसा था कि हम ही नहीं बल्कि मंत्रज्ञ और पापाजी भी कैमरे की ही तरफ़ देख रहे थे। वैसे ये शायद किसी के लिये आम बात हो सकती है पर उस वक़्त हमारे लिए ये बड़ी बात थी क्योंकि ये भी सेहत में सुधार का संकेत सा लगता था। पर शायद वो था नहीं क्योंकि अगले दिन यानी 27 सितंबर को हम तैयार हो रहे थे और अचानक ही पापाजी की तबियत बिगड़ गई। आनन-फ़ानन में उन्हें अस्पताल ले गये, समय पर इलाज भी मिला। कुछ दिनों तक सुधार भी दिखा लेकिन वो इलाज कभी नहीं हो पाया जिसकी हम उम्मीद करते रहे। उम्मीद और नाउम्मीदी में झूलते-झूलते न जाने कितना समय बीता पर हम उन्हें सही सलामत घर ला ही नहीं पाये। 27 सितंबर ही वो तारीख़ रही जब आख़िरी बार पापाजी को घर में हँसते- बोलते, चलते, ख़ुशी से गरबे में जाने के लिए तैयार होते देख पाए।उसके बाद उन्हें अस्पताल में ही देखा। 

#यादें 
#पापाजी by @instagramvasi
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12 days ago
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#विविधभारतीराष्ट्रीयसेवा..... 
अभिनेता विनीत  रैना अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 2003 में टीवी शो 'मुल्क' से की थी। उन्हें 'मैका' (Maayka) और 'इश्क में मरजावां' (Ishq Mein Marjawan) जैसे लोकप्रिय टीवी शो से विशेष पहचान मिली। 
इसके अलावा उन्होंने 'मर्यादा: लेकिन कब तक?', 'तुम बिन जाऊं कहां', और 'कसक' जैसे प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है। 
हाल ही में उन्होंने अंग्रेजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म 'ऑन डिफरेंट ग्राउंड्स' (On Different Grounds) के साथ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया है।
सुनिए अभिनेता विनीत रैना से दिलचस्प बातचीत.... 8 सितंबर 2026... शाम 4:00 बजे... कार्यक्रम "सेल्युलॉइड के सितारे"
सुनते रहिए विविध भारती... देश की सुरीली धड़कन 
 #DeshkiSurilidhadkan by @instagramvasi
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a month ago
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That’s a wrap! 🎬

Clicked this around 3 AM, after a long day on set. Just look at those faces — still smiling and giving it their all. 

Grateful to the cast @niyatifatnani , @rajivkhanna73  ji, @madhusree_sharma_official  ji, @vishalbhardwaj_008 bhai, @karim_hajee68  ji and crew for the energy, dedication and madness that went into these days. It’s the people who keep showing up, pushing through the long hours and giving their best that make a set what it is.

**P.S. Our male lead @shehzadss had an early pack-up and missed this one. Truly one of the most genuine people to have around on set.

Until the next one. 🎬

#verticaldrama #microdrama #SmallTownBoys #BhalaiLama #itsawrap taken in Future Studio by @instagramvasi
19
a month ago
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विनीत रैना से जब पहली बार मुलाकात हुई तभी लगा कि उनको बहुत अच्छी तरह पहचानती हूँ क्योंकि इतनी बार अलग-अलग किरदारों में देखी हुई थी।लेकिन जब बातचीत हुई और उन्हें जानने का मौक़ा मिला तो वो एक अलग ही अनुभव रहा। जैसा कि विनीत ही कहते हैं कि उनकी ज़िंदगी किसी फ़िल्म से कम नहीं रही, मुझे भी इस बातचीत में कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ..इस शानदार बातचीत की ये तो सिर्फ़ एक ही बात है बाक़ी सब आप ख़ुद सुनिएगा। 

आज यानी 8 सितंबर शाम 4 बजे से और पुनः प्रसारण me कल 9 सितम्बर को सुबह 10 बजे से, ज़रूर सुनिएगा। विविध भारती पर। 
(कुछ तस्वीरें विविध भारती के स्टूडियो में विनीत से मुलाक़ात की)
@vividh_bharati_rashtriya_seva by @instagramvasi
3
a month ago
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hopped on new shoot with some small town and some big town boys.

#verticaldramaseries #storytvofficial #shootoftheday #shootingday #bhalailama taken in Mumbai, Maharashtra by @instagramvasi
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a month ago
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रविवार 2 अगस्त, @ravicharysitar जी के ‘गुरुवंदन’ कार्यक्रम में शामिल होने का मौक़ा मिला। कई महीनों से तैयारियाँ शुरू थीं और शर्मिला (@sharmilakamate ) मै’म के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन का ही नतीजा है कि मैं लगातार चौथे साल भी इस कार्यक्रम में प्रस्तुति दे पायी। 

हर साल अलग-अलग तरह के ग्रुप बन जाते हैं। इस साल ग्रुप में बड़े मज़ेदार लोगों का साथ मिला। पूरा दिन सितार की स्वर लहरियों और बातों में अच्छी तरह बीता। हालाँकि इस कार्यक्रम में प्रस्तुतियों का क्रम नहीं बताया जाता, इसलिए अनिश्चित सा रहता है कि शायद जो हमें प्रोत्साहित करने या देखने आ रहे हैं उनके आने के पहले ही हमारी प्रस्तुति हो जाये।

लेकिन इस बार सभी के आ जाने के बाद ही प्रस्तुति की बारी आई। हमेशा की तरह सबसे पहले बिल्कुल समय से राजेन्द्र सर पहुँच गए। सर हर साल आते रहे हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं, प्रस्तुति भी हर साल देखते हैं। पिछले दो सालों की तरह इस साल भी @arte.miss529 भाभी और मंत्रज्ञ  समय से पहुँचे।इस साल मन्त्रज्ञ ने लंबे समय तक रुककर संगीत का आनंद भी लिया। पूजा सुबह की ड्यूटी के बाद पहुँची और शाम तक रुकी रहीं, कितनी थकान होगी लेकिन चेहरे पर शांति और सुकून ही नज़र आया। अरग़वान और अश्मा भी समय से पहुँचे अच्छी बातचीत हुई और अच्छी फ़ोटोज़ लेने में इनका बड़ा योगदान रहा। वीडियोज़ तो सभी ने बनाये।

इस साल पापाजी की कमी खली, याद भी आता रहा कि वो आए थे तब हम क्या-क्या किए थे। क्योंकि हर साल पापाजी साथ ही चलते थे और सारे दिन साथ बने रहते, AC रूम में ठंड रहती तो वो बाहर घूमते रहा करते। पिछले साल सेहत ठीक न होने के कारण वो नहीं जा पाये थे, पर फ़ोन पर लगातार बने हुए थे। पर उनका आशीर्वाद तो साथ ही है, वो भी होते तो ज़्यादा अच्छा होता। 

माँ-पापाजी के आशीर्वाद से अच्छी प्रस्तुति हुई। वैसे दो तानों में मैं चूकी भी लेकिन मन जानता है कि पिछले साल से कहीं अच्छी परफ़ॉर्मेंस हुई है। पिछले साल की परफ़ॉर्मेंस से मन उदास हो गया था लेकिन इस साल की परफ़ॉर्मेंस ने मन ख़ुश किया है।इसमें भी शर्मिला मै’म का सबसे बड़ा योगदान है क्योंकि उन्होंने ही मुझे प्रोत्साहित किया। 

@swarsanskrutimusicacademy की ओर से बहुत सुंदर और काम आने वाला यादगार तोहफ़ा भी मिला। by @instagramvasi
10
2 months ago
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एक बार फिर साल का वो दिन जिसका इंतज़ार साल भर रहता है। पूरे दिन बस सितार की झंकार और हम। अलग-अलग राग, अलग-अलग कलाकार, और सभी को साथ जोड़ती है तो सितार की तार। 

पिछले तीन सालों से @ravicharysitar जी के इस ‘गुरुवंदन’ कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है और अब ये चौथा साल है।मेरी गुरु  @sharmilakamate मै’म का साथ और मार्गदर्शन ही है जो हमें मंच पर बैठकर, सभी के सामने सितार वादन का आत्मविश्वास देता है। साथ में पूरे दिन सितार से प्यार करने वाले कलाकारों को सुनना और उनकी मुस्कान, चेहरे की शांति देखना एक अलग ही उत्साह जगाता है। मन पूरे दिन ख़ुश तो रहता ही है साथ ही इस विश्वास से भी भर जाता है कि किसी दिन हम भी इन कलाकारों की तरह बेहतर वादन करेंगे। 

जो भी मुंबई में हैं, कल समय निकालकर ज़रूर आइए। इस कार्यक्रम की ख़ास बात ये भी है कि कौन कितने बजे प्रस्तुति देगा ये बात पहले से बतायी नहीं जाती है इसलिए आप जब भी समय मिले तब आइए। हमारी प्रस्तुति नहीं देख पाये तो भी कोई बात नहीं क्योंकि सितार का आनंद तो पूरे दिन लिया जा सकता है। ज़रूर आयें, इंतज़ार रहेगा। 

#गुरुवंदन 
#सितार by @instagramvasi
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2 months ago
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The Name Stayed Small. The Vision Didn’t. 

#newventure #SmallTownBoys #WebSeries #BhalaiLama #newbeginnings taken in Bhatia Island by @instagramvasi
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2 months ago
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जून का महीना यात्रा का महीना रहा।ज़िन्दगी में पहली बार अकेले ही यात्रा पर निकली और रेल यात्रा का अलग ही अनुभव रहा(इस अनुभव पर बात बाद में क्योंकि इसकी तो एक अलग ही पोस्ट बनती है) तो पहले बात यात्रा के पहले पड़ाव यानी मामाजी के घर की। 

11 साल बाद मामाजी के घर पहुँची।नानी/मामा का घर कुछ ऐसा होता है जहाँ बचपन की कई यादें होती हैं। हमें कई ऐसे लोग मिलते हैं जो बचपन की बातें बताते हैं। हम बचपन में क्या किया करते थे, कैसे उनसे मिला करते थे वगैरह वग़ैरह। वो एक ऐसी जगह होती है जहाँ आपको न सिर्फ़ लोग आपकी माँ के नाम से पहचानते हैं बल्कि आपको आते-जाते यूँ ही कुछ भी खिलाया जाता है, गिफ़्ट मिलते रहते हैं और मना करने या संकोच करने पर डाँट भी पड़ सकती है। 

मेरे लिए ये जगह और ख़ास हो जाती है क्योंकि यहाँ जाने पर मैं मामाजी के घर के साथ-साथ दो मौसीजी के घरों में भी जा पाती हूँ, साथ ही एक और मौसीजी और मौसेरी बहन से मिलने का मौक़ा भी मिल गया। लंबे समय के बाद ये ऐसा मौक़ा था जब लगा कि वाक़ई उन जगहों पर लौटी हूँ, जहाँ एक अलग तरह का अपनापन है। 

बहनों के साथ कई बार मज़ा भी आता, कभी बहुत गहराई से ज़िंदगी की बातें होतीं, कभी बहस होती तो कभी एक-दूसरे की आदतों से एक अजीब सी चिढ़ भी होती और कई बार उन्हीं अजीब आदतों पर खुलकर हँसते भी हैं। एक-दूसरे के किस्से सुनाते और खुलकर हँसते, रात भर जागकर खेलते और फिर सुबह किसी के आवाज़ करने पर जल्दी नींद भी खुल जाती।फिर दोपहर में सोने का प्लान बनता लेकिन बातों के बीच सोने का समय ही कहाँ होता। 

मामाजी-मामीजी ने पूरा ख़्याल रखा कि किसी तरह की कोई कमी न लगे।यही नहीं समय पर खाना तो अलग बात है लेकिन पसंद की चीज़ों को याद कर-करके ये सुनिश्चित करना कि किसी तरह उन ग्यारह दिनों में ही वो सब चीज़ें खिला दी जाएँ, (फिर चाहे वो छोटी सी चीज़ हो या कोई पसंदीदा फल), संभव जगहों पर घुमा दिया जाए, आपका जो मन करे, जैसा मन करे वैसा रहने की बात कही जाये।कहीं न कहीं मन में ये बातें दर्ज़ होती हैं कि किस तरह से बिना कहे सब आसपास होता जा रहा है। आप कुछ याद करते हैं कि बचपन में एक बार ये किया था और अगले दिन आप उसी याद को जी रहे होते हैं। 

बाद में स्कूल की सहेलियों से मिलना तो बोनस रहा और लंबे समय से टलता हुआ रायपुर भ्रमण भी हो ही गया। ये पूरी यात्रा एक अलग ही अपनेपन और बेहतर अनुभव से भरी हुई रही।पर जून की यात्रा यहीं ख़त्म नहीं हुई और भी एक ख़ास यात्रा जून में हुई जिसकी बात भी बाद में। 

#मामाजी_का_घर 
#गर्मी_की_छुट्टी by @instagramvasi
5
3 months ago
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आज माँ का पाँचवाँ ऐसा जन्मदिन है जब वो हमारे साथ सशरीर नहीं हैं। माँ के जन्मदिन पर याद आ रहा है कि माँ अपने जन्मदिन पर सभी की पसंद के व्यंजन बनाया करतीं थी। तो हमारे लिए उनका जन्मदिन एक उत्सव सा होता। फिर थोड़े बड़े हुए तो उस दिन उन्हें किचन से छुट्टी हुआ करती और उस दिन उनकी पसंद का कुछ बनाया जाता। हालाँकि किचन से छुट्टी के बावजूद तेल- नमक- मिर्च-मसाले सबके बारे में इतना पूछा जाता कि माँ सोचती होंगी कि इससे अच्छा मैं ही बना लेती। बाद-बाद में हम माँ के लिए किचन की चीज़ों के अलावा कोई गिफ़्ट भी लाया करते। कई बार लगता है कि ये सारी बातें थोड़ी पहले ही पता होती तो उनके मन का और भी बहुत कुछ कर पाते। वैसे माँ को इस बात की शिकायत कम ही रहा करती।

अब माँ साथ नहीं हैं तो उनका जन्मदिन एक अलग ही एहसास लेकर आता है। भले ही हम ख़ुद को बहलाने के लिए कितने ही शब्द इस्तेमाल कर लें कि माँ आसपास ही हैं, हमारे अंदर हैं वगैरह, वगैरह। पर असलियत का अंदाज़ा होता है जब माँ की तस्वीर देखते हुए आभास होता है कि अब ये पल हमारे पास नहीं हैं और न ही कभी मिलेंगे।

इन दिनों कभी-कभी जब सपने में माँ दिखती हैं तो कई बार ऐसा लगता है कि ये वास्तविकता है और जब ये वास्तविकता टूटेगी तो सपना शुरू होगा जो माँ के बिना चलता रहेगा। आज माँ की फ़ोटो तलाशते हुए भी मन एकदम भारी हो गया। कोई भी ये सारी भावनाएँ तब तक नहीं समझ सकता, जब तक उसने ख़ुद ये भाव अनुभव न किया हो। मुझे भी मन भारी होना जैसे शब्द समूहों का आभास पहले कभी नहीं था लेकिन माँ के जाने के बाद समझ आया कि कैसे एक तस्वीर भी आपको ये बात महसूस करवा सकती है।

आज माँ के जन्मदिन पर यही कामना है कि उनके आशीर्वाद और स्नेह की जो धरोहर हम भाई-बहन के पास है वो कम न हो बढ़ती ही जाये। ईश्वर हमारे धैर्य और सहनशीलता को बढ़ाते रहें क्योंकि साल दर साल कमी सी लगने लगी है। 

#माँ by @instagramvasi
3
3 months ago
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कुत्ता लाइफ़ by @instagramvasi
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4 months ago
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पापाजी को बातें करना और लोगों को जानना पसंद रहा। जहाँ भी जाते या कोई भी आता तो पापाजी उन व्यक्तियों के बारे में बहुत सारी जानकारी हो जाती थी। कई बार हमारे दोस्त उन्हें कई ऐसी बातें बता जाते तो हमें भी पता न होतीं।

 पापाजी को जगहों की जानकारी भी भरपूर थी, यात्रा का शौक भी इतना रहा कि बड़े शहरों के साथ-साथ कई ग्रामीण इलाकों के बारे में भी विस्तार से जानते थे। उनकी दिलचस्पी आध्यात्म में भी गहरी थी। उन्हें तरह-तरह के मंत्र, स्त्रोत, चालीसा कंठस्थ हुआ करते। कई बार कोई नया मंत्र सामने आता है तो पता चलता है कि ये तो पापाजी के मुँह से कई बार सुना है। 

पापाजी के जाने के बाद से मुझे कई बार बहुत से लोग मिलते हैं जो उनके बारे में पूछते हैं। कुछ लोग मुझे उनके साथ देखने के कारण पहचानते हैं और पापाजी के बारे में पूछते हैं।अलग-अलग  दुकानवाले, सब्ज़ी वाले, मंदिर के पुजारी, कोई नहर निगम का बड़ा अधिकारी, कोई छोटी सी दुकान वाला जिसके पास वे पापाजी कोई ख़ास चीज़ लिया करते, कोई धूप बत्ती वाला, तो कभी कोई बेहद अनजान इंसान।

 मुझे मन में एक ज़िम्मेदारी सी लगती है कि पापाजी जिन-जिनको जानते थे उन सभी को पापाजी के बारे में बता सकूँ। पर पापाजी के परिचितों का संसार इतना विशाल है कि मैं अपनी पूरी ज़िन्दगी में भी यह काम नहीं कर पाऊँगी।

#फ़ादर्स_डे by @instagramvasi
1
4 months ago
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