Posted On: January 9th 2026, 07:21 pm
मैंने बहुत बरसों तक ख़ुद की एक भी तस्वीर नहीं खींची थी,
क्योंकि मैं उस व्यक्ति को जानता ही नहीं था
जिसकी तस्वीर मैं उन दिनों खींचने की कोशिश कर रहा था।
अब जो शख्स मुझे आईने में नज़र आता है,
वो न तो पूरी तरह अजनबी है न ही परिचित,
मगर हम दोनों साथ रहते हैं अब, ख़ुश हैं या नहीं, पता नहीं,
मगर वो कभी-कभी हँस देता है मुझे देखते हुए,
और मैं उसका हँसना लिख रहा होता हूँ।
- कर्ण
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