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मित्रता केवल एक दिन मनाने का विषय नहीं है।
जिस दिन किसी से सच्ची मित्रता होती है, उसी दिन से वह हमारे जीवन की हर धड़कन, हर साँस और हर सुख-दुःख की साथी बन जाती है।
मित्रता में न उम्र का बंधन होता है, न अमीरी-गरीबी का, न स्त्री-पुरुष का कोई भेद। मित्र तो बस मित्र होता है—वह रिश्ता जो विश्वास, अपनत्व, स्नेह और निस्वार्थ भाव की नींव पर खड़ा होता है।
मित्रता जीवन का सबसे सुंदर, पवित्र और अनमोल संबंध है। यह रक्त से नहीं, बल्कि हृदय से जुड़ता है। सच्चा मित्र हमारी खुशियों में दिल से मुस्कुराता है और विपरीत परिस्थितियों में बिना बुलाए हमारे साथ खड़ा दिखाई देता है। वह हमारी कमियों पर पर्दा नहीं डालता, बल्कि उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है और हमें सही मार्ग पर आगे बढ़ने का साहस देता है।
मित्रता केवल साथ घूमने-फिरने, हँसने-बोलने या समय बिताने का नाम नहीं है। यह एक-दूसरे के प्रति सम्मान, विश्वास, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का नाम है। सच्चा मित्र वही है ज by @reetjain_
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3 months ago
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सुरों का मिलन हो गया,
साज़ भी साथ हो गया।
दिल की तानें गूँज उठीं,
राग-रंग सब रंग गए। 
साँसों में बस गई हर वो धुन,
जिसमें सुमधुर यादें बन गयी।
अलविदा आशा जी 🙏😔 by @reetjain_
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6 months ago
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 by @reetjain_
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a year ago
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आंख धोखा है, क्या भरोसा है
सुनो दोस्तों शक़ दोस्ती का दुश्मन है
अपने दिल में इसे घर बनाने न दो
कल तड़पना पड़े याद में जिनकी 
रोक लो रूठ कर उनको जाने न दो 
बाद में प्यार के चाहे भेजो हज़ारों सलाम 
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते 
ज़िन्दगी के सफ़र में ...

मशहूर गीतकार आनंद बक्षी जी की ये लाइनें ज़िंदगी की सच्चाई को दर्शाती है। जीवन और मृत्यु के बीच इंसान एक अनोखी यात्रा पर होता है। यह यात्रा कब समाप्त हो जाएगी कुछ नहीं कहा जा सकता। ज़िंदगी में जो पाना है,जो जीना है बस आज ही कर लो, कल किसने देखा !

अभी कुछ दिन पहले ही की बात है- देश और दुनिया के जाने माने सिने पत्रकार, लेखक, समीक्षक Ajit Rai  जी जिन्होंने लंदन में अपनी पुस्तक का विमोचन किया। 
वे जब भी किसी समारोह में शिरकत करते चाहे देश में या विदेश में, वहीं से लाइव प्रसारण करके बहुत सारी सिने जानकारी देते थे। सिनेमा और रंगमंच के ऐसे जानकार थे कि इस दौर में कोई विरला ही होगा। उन्हें चलता- फिरता एनसाइक्लोपीडिया कह सकते है। यह बात मैंने उनके दो बार उनके लाईव इंटरव्यू में महसूस की।
देश और दुनिया में ऐसा कोई फिल्म महोत्सव नहीं होता, जहाँ उनकी उपस्थिति न दिखी हो। फिर वो कान फिल्म फेस्टिवल हो या ऑस्कर अवार्ड। हिंदी सिनेमा के बारे में जब वो बोलना शुरु करते थे, तो कई घंटे वो जानकारी दे सकते थे। उन्हें सब कुछ मुँह-जुबानी याद रहता था। 

मेरी उनसे रूबरू दो बार मुलाक़ात हुई, वैसे फेसबुक के माध्यम से हम हमेशा जुड़े रही। हर बार उनकी पोस्ट पढ़ती और कमेंट करती तो इतनी व्यस्तता के बाद भी वो उस पर जवाब जरूर देते। हर मुलाक़ात में वो बहुत ही आत्मीयता से मिलते।
उनके साथ जब तस्वीर खिंचवाई तो बोले मुझे भी भेजना, उनको मेसेंजर पर तस्वीर भेजी तो उन्होंने तुरंत अपना नंबर भेज दिया, और लिखा संपर्क बनाएँ रखना, सिने जानकारियां साझा होती रहेंगी, यह थी उनकी सरलता - सहजता।
अभी तो आपसे बहुत कुछ सीखना था, इतनी भी जल्दी क्या थी, हमसे विदा लेने की 😞 
इसीलिए जीवन में जो भी पाना है, सीखना है, वो आज ही कर लो, कल किसने देखा, पता नहीं कब क्या हो जाए।
एक बात और किसी की अच्छाई का गुणगान उसकी जिंदगी के रहते कर। लो, जाने के बाद में तो वह सुन ही नही पाएगा।😞
ॐ शांति 🙏
Indore Literature Festival by @reetjain_
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a year ago
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ज़िंदगी और भजिये 
बारिश का मौसम रिमझिम बरसता पानी तो ऐसे मे मन कहे, करो गर्म तेल और बनाओ भजिये और खाओ। अब ये मन ही तो नही मानता बड़ा जिद्दी स्वभाव का है।
तो आज भजिये बनाते समय मन मे ख्याल आया की भजिये और जिंदगी का गहरा नाता है। बेसन में जिस तरह कभी प्याज़,कभी हरी मिर्च,कभी गिलकी तो कभी आलू मिक्स कर लेते और भजिये बना कर बड़े स्वाद से खा लेते,बस वैसे ही जिंदगी मे कभी खुशी ,कभी गम,कभी आशा, कभी निराशा मिक्स होते रहते। और वो सब हम कभी सरलता से तो कभी कठिनाई से पार कर लेते है।
जिस तरह भजिये तेल मे उलट -पलट कर तलकर अपनी यात्रा पूर्ण कर एक नया रूप ले लेते बस जिंदगी भी एक यात्रा है, जिसमें हर पल अनुभव, भावनाएँ और सीख आती रहती और हम उन सबसे पककर मजबूत बन जाते है।
जिस तरह भजिये का आकार कभी गोल तो कभी आड़ा- तिरछा  और हम बड़े चाव से उसे खाते वैसे ही जिंदगी  में भी उतार -चढ़ाव आते रहते, उसे स्वीकार करते रहिये और आगे बढ़ते रहिये।
भजिये मे जैसे सब वस्तुओ का मिश्रण होता वैसे ही ज़िंदगी मे भी सभी का मिश्रण है। 
तो अगली बार भजिये खाये तो उसे ज़िंदगी से जोड़ते जाए और खुश होते जाए।
अच्छा अब ये भजिये देखकर कोई कहेगा की ये स्वास्थ्य के लिए ठीक नही तो इसलिए बेलेंस बनाये रखने के लिए साथ मे चुकंदर - टमाटर का सूप है। अब ज़िंदगी मे हर चीज का तालमेल जरूरी है ना।🤪 by @reetjain_
1
a year ago
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हिंदी सिनेमा मे 25 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई💐💐
बच्चन कुल का कुलदीपक हो आप,
पिता की विरासत को संभाले हो आप,
हर कदम पर फर्ज निभाते हो आप। 
सबके दिलो की धड़कन हो आप।
रिफ्यूजी बनकर आए, दिलों में धूम मचाई,
दसवीं पास कर, कभी गुरु बने , कभी सरकार बनाई।
कभी अलविदा न कहकर, लापता न होने देंगे,
बच्चन का जादू, हर फिल्म हाउसफुल करेंगे!
दोस्ताना सा व्यवहार, सदा दिलों में बसेरे,
बंटी-बबली संग घूमर करेंगे।
25 सालों का सफर, सिनेमा को रंग दिया,
‘पा’ के किरदार से दुनिया का दिल जीत लिया।
दिल से दिल तक, वफ़ा है सदा,
I want to talk हम आपके है सदा।
बधाई हो, अभिषेक बच्चन जी
आपका सितारा चमके सदा।

@bachchan जी
@amitabhbachchan  जी
@bachchanjrfc by @reetjain_
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a year ago
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वर्षा ऋतु ने दस्तक दे दी है। मौसम सुहावना हो चला है। ऐसे में सुबह -सुबह पंछियो की मधुर चहचहाहट श्रवण हो तो पुस्तक पढ़ने में आनंद ही आनंद है।
आदरणीय प्रिय Ashutosh Rana सर जी द्वारा लिखित पुस्तक #रामराज्य जिसमें
ऋषि विश्रवा और सुपर्णा की वार्तालाप का वर्णन है-

मनुष्य ने भले ही अपनी सुविधा के लिए काल को भूत, भविष्य, वर्तमान में बाँट लिया है, किंतु इस संसार में यदि कुछ सत्य है तो मात्र वर्तमान का क्षण ही है और जो सत्य है वही शिव है। जो शिव है वही सुंदर है। और सुंदर क्या है? स्वा के द्वार से स्वयं में प्रविष्ट होना, क्योंकि स्वयं से संगति ही हमारी प्रगति का आधार है और आत्मा की उन्नति, उसका परिष्कार ही तो वास्तविक सुंदरता है।

इसका मुझे ये भाव लगा---
अतीत और भविष्य केवल मन की रचनाएँ हैं, जबकि वर्तमान ही एकमात्र वास्तविकता है। हम उसी वास्तविकता से दूर होते जा रहे है। जीवन की सुंदरता को भौतिक साधनों में जोड़कर बैठे है। जबकि सुंदरता तो आत्मिक रूप से होती है। जिसका मन निर्मल-उसका तन निर्मल। अपने आप से जुड़िये,अपने आप में खुश रहिये। कल की छोड़ आज में जीना सीखिए। जितना मिला उसी में खुश रहकर ज़िंदगी का आनंद लीजिये। by @reetjain_
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a year ago
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 by @reetjain_
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2 years ago
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taken in Sydney by @reetjain_
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2 years ago
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outstanding  Performance @nehakakkar # Norwest Convention Centre
#sydney by @reetjain_
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2 years ago
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सुप्रिय प्रशंसक ऋतिका जैन को 
आशुतोष राणाजी 'रामराज्य' आशीषें, 
बहनापा-सा गले लगा कहा बहना,
रिश्ता जीवंत रखना तुम्हारे जिम्मे।
Ashutosh Rana jj by @reetjain_
2
2 years ago
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बड़वानी का सर्वोदय मेला:

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में 12 फ़रवरी की सुबह सूरज की चमक के साथ नर्मदा के तट पर एक ऐतिहासिक आयोजन जीवंत हो उठता है—#सर्वोदय_मेला।
सर्वोदय नाम ही क्यों? वो इसलिए कि सर्वोदय (यानी सबका उदय) एक संस्कृत शब्द है, जिसका आमतौर पर अर्थ है "सार्वभौमिक उत्थान" या "सभी की प्रगति"।
 यह मेला न केवल महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई की अस्थियों के विसर्जन की स्मृति को संजोता है, बल्कि गांधीवादी विचारों को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। 
सत्य, अहिंसा और सर्वोदय के सिद्धांतों को प्रज्ज्वलित करते हुए, यह आयोजन हमें गांधीजी के अमर विचारों की ओर पुनः आकर्षित करता है।
 दिल्ली के बाद गाँधीजी ,कस्तूरबा गांधी जी ,उनके निजी सचिव टवलई के स्वतंत्रता सेनानी महादेव भाई देसाई की अस्थियां नर्मदा के पवित्र तट पर लाई गई थीं। दिल्ली के राजघाट के बाद गांधीजी का दूसरा समाधि स्थल यहीं स्थित है। उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियां भारत की प्रमुख नदियों में प्रवाहित की जाएँ, ताकि उनके विचार और दर्शन देश के कोने-कोने तक पहुँच सकें। 
 जनवरी 1965 में गांधीवादी काशीनाथ त्रिवेदी जी ने इनकी अस्थियां यहाँ लाकर नर्मदा किनारे इस ऐतिहासिक समाधि की नींव रखी थी, जो 12 फरवरी 1965 को बनकर तैयार हुआ था, जिसे #राजघाट नाम दिया गया था। हालांकि, 27 जुलाई 2017 को सरदार सरोवर बाँध के डूब की जद में के कारण, इन अस्थियों को बड़वानी के कुकरा बसाहट में पुनर्स्थापित किया गया। 
बापू की अस्थियां देश में कई स्थानों पर संचित हैं, वहीं कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई की अस्थियां पुणे के आगा खान महल में दो अलग-अलग समाधियों में संरक्षित हैं। परंतु बा, बापू और उनके अनन्य सेवक महादेव भाई देसाई की अस्थियां एक साथ केवल बड़वानी के राजघाट में ही संचित हैं।
 श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु लोग समाधि स्थल पर एकत्र होते हैं और गांधीजी को नमन करते हैं। 
 बड़वानी का सर्वोदय मेला महात्मा गांधी की अमर विरासत को न केवल संजोता है, बल्कि समाज में नैतिकता, सामाजिकता और आध्यात्मिकता के मूल्यों को पुनर्जीवित करने का एक पवित्र प्रयास भी है।
चित्र-12 फरवरी 2025 taken in Barwani, M.P, INDIA by @reetjain_
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2 years ago
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