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Do we know! by @thelegendmit
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3 days ago
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इस्लामिक आतंकवाद की सनक और काफिरों के खात्मे के सपने लेकर पहलगाम पहुँचे जालीदार खोपड़ी वाले मुसलमान आतंकवादीयों ने 22 अप्रैल 2025 को हिंदुओं को उसका धर्म पूछकर, खतना देखकर और कलमा पढ़वाकर उनके धर्म की पुष्टि की। जो आतंकवादियों के अपने मजहब वाले थे उन्हें जिन्दा छोड़ दिया, लेकिन जो काफिर यानि हिंदू थे उनके सर में गोली मार दी। मुख्यतः पुरुषों के सर में गोली मारी गई एवं उनकी नई नवेली पत्नियों को जिन्दा लाश बनाकर छोड़ दिया। साथ हीं साथ ये संदेश भी दिया गया की जाओ जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बता देना। इस तरह कुल 26 हिंदू पुरुष पर्यटक को बिना किसी गलती के जान इस्लामिक आतंकवादीयों ने ले ली। उनके पीछे रह गया तो सिर्फ उनका रोता, बिलखता और छटपटाता परिवार। उनसे भी दर्दनाक स्थिति वो रही जब नए नवेले परिणय सूत्र में बँधी वो महिलाएं जिन्होने अपनी मांग का सिंदूर उजड़ते अपनी आँखों के सामने देखा था। सोंचिये इस घटना के बाद क्या मनोदशा रही होगी उन महिलाओं की! क्या आपको भी लगता है आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता! विचार अवश्य कीजियेगा।

पहलगाम हमले में इस्लामिक आतंकवाद की भेंट चढ़े 26 हिंदू पुरुषों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि। 💐💐 by @thelegendmit
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5 months ago
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The Pinki aunty.. by @thelegendmit
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7 months ago
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सेक्युलर और मुल्लावादी ताकतें कहती हैं की हिंदू मुस्लिम भाई भाई हैं। लेकिन याद रखें दुनियाँ के हर अब्दुल के दिल दिमाग़ में एक जिहादी और मुल्लावादी हमेशा बसता है, जो समय समय पर अलग अलग रूप रंग में सामने आता रहता है। 

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पांच सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। मनोज सिन्हा ने शिक्षक मोहम्मद अशफाक, लेबोरेटरी तकनीशियन तारिक अहमद शाह, अस्सिटेंट लाईनमैन बशीर अहमद मीर, फॉरेस्ट विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट्ट और स्वास्थ्य विभाग के ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।

जांच के दौरान पता चला कि ये पांचों कर्मचारी आतंकी संगठन लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम करते थे। सरकारी पदों पर रहते हुए, वे जनता के पैसे से सैलरी ले रहे थे, जबकि गुपचुप तरीके से इस्लामिक आतंकी संगठनों के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे। LG प्रशासन ने अब तक 85 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जो इस्लामिक और मुल्लावादी आतंकवादी संगठनों के लिए काम करते पाए गए थे। by @thelegendmit
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9 months ago
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ए मुल्लावादियों और सेक्युलरों.. एक बात बताओ तुम गाजा में मुसलमानों पर अत्याचार के विरुद्ध लड़ने जाने को आतुर दिखे लेकिन गए नहीं और तो और मानवता की दुहाई भी देते नहीं थकते थे। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इराक में प्रदर्शन कर रहे मुसलमानों में से 12000 लोगों को वहाँ की सरकार ने सीने में गोली मरवा दिया है। तुम्हारा खून सूख गया है क्या जो इराक में मुसलमानों पर होता अत्याचार नहीं दिखता, या तुम यहाँ भी वैसी ही मक्कारी कर रहे हो और धोखे में रख रहे हो और लड़ने नहीं जा रहे जैसे गाजा नहीं गए थे या फिर 72 हुर्रे खत्म हो गई हैं जन्नत से! आखिर मामला क्या है मुल्लावादियों? by @thelegendmit
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9 months ago
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लो भाई... ईरान के लोग कह रहे हैं ईरान तो चाहिए लेकिन "मुल्ला" नहीं चाहिए क्योंकी मुल्ले हीं आतंकवादी हैं और उन्हें यहाँ से जाना हीं होगा। अब मुल्लावादीयों और जिहादियों के अंतर्रारष्ट्रीय अब्बाजान लोग भी सच बोलने से कतरा नहीं रहे हैं। क्या यहाँ वाले भी सच को पसंद करते हैं? by @thelegendmit
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9 months ago
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यहाँ के मुल्लावादी और जिहादीयों को शरिया कानून चाहिए और बुरखा चाहिए। जबकि बुरखावादियों की असली अम्मीजान जो ईरान में रहती हैं वो तो कह रही हैं की इस्लाम पौराणिक परशिया यानि फ़ारस या यूँ कहें ईरान का मौजहब नहीं है। इस्लाम इनके उपर यातना देकर, जान की धमकी देकर, उनका वलात्कार कर, उनका सर काटकर और गुलाम बनाकर थोपा गया है। वहाँ की जनता और मुख्यतः महिलाओं में गुस्सा है और सड़कों पर इस्लामिक मानसिकता के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। वहाँ की लड़कियां और महिलाएं अपने बुरखे जला रही है और इसे इस्लाम से आजादी का महोत्सव बता कर सरकार के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन करते हुए जगह जगह आगजनी और तोड़फोड़ भी कर रहे हैं। कहा जाता हैं इस्लाम एक शांति का मजहब है और इस झूठ को एक सोंची समझी साजिश के  तौर पर पूरी दुनियाँ में स्थापित किया गया है। इस झूठ की परतें 1400 साल बाद हीं सही, लेकिन खुलने लगी हैं और दुनियाँ के कोने कोने में इस झूठ के पीछे छुपे एजेंडे को लोग समझ चुके हैं और ये मानने लगे हैं की ये सब बातें एक फ़्रॉड हैं। ये मुल्लावादी, जिहादी और आतंकवादी विचारों से भरी सोंच हीं इस्लाम की असलियत हैं और इसका विरोध अब इस्लामिक मुल्क ईरान से शुरू हुआ है और अंत कहाँ जाकर होगा ये देखना होगा। by @thelegendmit
2
9 months ago
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इस्लामिक देश बांग्लादेश में हिंदुओं को वहाँ के मुसलमान जिहादी और कट्टरपंथी को प्रोटेक्शन मनी देना होता है अपने आप को जिन्दा रखने के लिए भी। सेकुलरिज्म की बीन बजाने वाली औरंगजेब और मुगलों की नस्ली औलादें और उसके राजनैतिक संरक्षक की नसों में बसी जिहादी जहर से भरे खून क्यों नहीं उबलते जब मुल्लावादी, जिहादी और आतंकवादी ताकतें अपने असली रंग रूप का परिचय रोज देती है और उसका नुकसान सिर्फ और सिर्फ हिंदू समाज को होता है! सेकुलरिज्म सिर्फ हिंदुओं के मौत का सौदा और जिहादीयों एवं आतंकवादीयों के बचाब का तंत्र भर है और उसका असली रूप हरेक भारतवासी को समझना होगा। by @thelegendmit
1
9 months ago
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मुसलमानों के हाथों बनी हर चीज या तो सेक्युलर होती है या हलाल। सेकुलरिज्म वाले रूहानी विचार फैलाने के लिए अलग अलग प्रयास जारी हैं, उसी प्रयास में मुसलमान पूरी दुनियाँ को थूक में लिपटी रोटियां, नाली के पानी में बने लजीज बिरयानी, मूत्र छिड़ककर फल तो कहीं मिठाई में टट्टी मिला कर काफिरों को खिला रहें हैं ताकि भाईचारा और सेकुलरिज्म की मजबूती बनी रहे। बस ये रूहानी बातें हिंदुओं को समझ नहीं आती है की भाईचारा वाकई में कितना जरूरी है। by @thelegendmit
10
9 months ago
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मुल्लावादी सेकुलरिज्म जिंदाबाद। हिंदुओं को भी कितना प्यारा लग रहा है न सेक्युलर बनकर! सेकुलरिज्म का माला टांग कर घूमते रहें और मुल्लावादी जिहाद की बली चढ़ते रहें। आज न तो अभिव्यक्ति की आजादी ना सेकुलरिज्म वाला सुनहरा अजान बज रहा है ना प्रेस फ्रीडम की बातें हो रही हैं। क्यों? क्यूंकि मारने वाला मुसलमान है और मरने वाला हिंदू है। by @thelegendmit
7
9 months ago
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आरफा खानम शेरवानी नाम है इस बेगम का। कहने को तो ये पत्रकार हीं है लेकिन इनका पाकिस्तान और मजहबी प्रेम कैसे छलकता है ये इनकी भाषा से हीं समझा जा सकता है। पाकिस्तानी आर्मी के मुखिया को भी "साहब" जैसे शब्दों से सम्बोधन लेकिन अपने देश के प्रधानमंत्री को सीधा नाम लेकर सम्बोधन करती है। बस ऐसी अराजकतावादी और मुल्लावादी सोंच को बढ़ावा देना हीं हमारे यहाँ सेकुलरिज्म माना जाता है। और हाँ! किसी ने भी सेक्युलरिज्म के नाम पर चल रही अराजकता और मुल्लावाद को चोट पहुंचाई तो वो संघी माना जायेगा। by @thelegendmit
2
9 months ago
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क्रिसमस पर हुई छिटपुट घटनाओं को धार्मिक दृष्टिकोण देने वालों ने, देश की राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट के आस पास कोर्ट के आदेश के अनुसार हुई अतिक्रमण के विरुद्ध करवाई करने गई दिल्ली पुलिस और MCD की टीम पर पत्थरवाजी करने वाली गिरोह का मजहब पता नहीं लगा पा रही हैं। क्या इस तरह देश में सेक्युलरिज्म को मजबूत होता देखना वाकई बहुत राहत देता है। सेकुलरिज्म के जरिये मजहबी उपद्रव को उचित ठहराने के लिए एक पूरी मशीनरी काम करती है और इसके जरिये हिंदुस्तान के हर संस्था तक को गलत ठहरा दिया जाता है ताकि मजहबी उपद्रव आराम से चलता रहे। जय सेकुलरिज्म। by @thelegendmit
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9 months ago
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