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मेरे पास कहने लायक कुछ न हो
मगर फिर भी मुझे सुना जा सकता है।।
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मिलूं किसी क्षण तुमसे तो बात कहूंगा
प्रेम दिया है तुम्हे बस उतना कहूंगा
तुम नकार देना लगे तुम्हे गर वो झूठी
और कहना अपना किस्सा बांध के मूठी
कह देना तुम सारे दोष जो देखे तुमने 
जो कह न सकी तुम जब, थी साथ तुम मेरे
अब तो जाने का डर भी नहीं है अंदर तेरे
खाई हमने थी जो कसमें सारी झूठी
कह देना तुम सारी बातें बांध के मूठी
संकोच न करना विरह में यही तो रीत है
कह सको अपने मन की यही तो प्रीत है।
/रितेश
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मैं पसीने से भीग चुका था मैंने अभी उसके मैसेज पढ़े एक एक करके उन सभी का जवाब देने का साहस जुटा ही रहा था कि तभी उसका एक और मैसेज आया "तुम मुझे इतना क्यों याद आते हो" जिंदगी में प्रेम का आना स्वाभाविक है और जाना भी। पर वह किस स्थिति में आता है और किस स्थिति में जाता है वह हमारी बहुत प्रभावित करता है हमारी यादों को। साथी का कहीं दूर चले जाना उतना ही दुख पहुंचाता है जितना उसे किसी और के साथ देखने से। मैं किसी दूसरे शहर में उसकी यादों से जूझ रहा था और वह किसी और शहर में मेरी यादों से, उसके इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था मैंने उससे मिलने वाली बात के लिए हांमी भर दी। यह सब सुबह के करीब 4:00 हो रहा था मुझे एक साथ कई सारी चिंताओं ने घेर रखा था। क्यों इतने दिन बाद क्यों? मैंने कहीं जल्दी तो हां नहीं बोल दिया मिलने के लिए? कल क्या होगा मैं कैसे मिलूंगा इतने सालों बाद? कई सवाल घूम रहे थे मेरे ज़हन में एक साथ। मैं क्या बोलूंगा जब देखूंगा उसे.... नहीं मैं नहीं कर सकता मैं नहीं जाऊंगा मना कर देता हूं ...... तभी दूसरा मन कहता है अबे चुतीया हो क्या? जाओ देखो उसे कितनी खूबसूरत है! क्या बदल गई होगी या वैसी की वैसी है एकदम झल्ली, बकबक करने वाली, कितना लिख दूं कि आप लोगों से मिलवा दूं उसे उसकी आंखें बाल कमर क्या क्या बोलूं किस बला की खूबसूरत है वह। इश्क में कोई कितना सुंदर लग सकता है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। सुबह कितनी जल्दी हो गई हमारे मिलने का समय दोपहर 1:30 बजे तय हुआ। उससे मिलने की खुशी और चिंता एक साथ थी मुझे। मैं परेशान था की कैसे जाऊं क्या बोलूं क्या पहनूं मैं एक बार फिर से उसे इंप्रेस करना चाहता था। थी सब सोचते सोचते समय निकला जा रहा था और मैं इतनी देर में यही नहीं डिसाइड कर पा रहा कि क्या पहन कर उससे मिलने जाऊं मेरी मां परेशान है कि इसे आज हुआ क्या है आईने के सामने खड़े होकर बोलने की प्रैक्टिस मूवी में देखें डायलॉग ऐसे याद कर रहा हूं की पूछो ही मत। बस मैं सुबह से तैयार हो रहा हूं और अभी तक यही नहीं कर पाया बारी कपड़ों की थी मैं यही नहीं सोच पा रहा था कि क्या कपड़े पहन कर जाऊं। पूरी अलमारी को तहस-नहस करके बैठा मम्मी के ऊपर चिल्ला रहा था कि मेरे पास कोई कपड़ा ही नहीं है पहन के कहीं जाने के लिए मम्मी ने कहा अपनी फेवरेट ब्लैक शर्ट पहन कर जाओ तभी मुझे याद आया कि अरे यार वह तो धुली ही नहीं है फटाफट वाशिंग मशीन चलाई उसे धुला और ड्रायर में सुखाया और फिर धूप में। 

शेष कॉमेंट में।
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